तुझसे सवेरे मिलूंगा मैं

तेरी हर बात में रात है. सर से घुंघराले अंधेरों का झरना ऐसे गिरता है जैसे क्षितिज पे रात का साया ढल रहा हो. और उस झरने में से झांकता है एक चाँद, हर उस चीज़ की रौनक लिए जो ज़िन्दगी को खूबसूरत बनाती है. ये जो होठो पे रातरानी की गन्ध सजी है, इतनी मंद है की समझ नहीं आता मुस्कान है या तेरा गुमान. और आँखें.. उफ़ ये आधी खुली आँखें.. ये नींद को सपने देखना और रात को मदहोशी सिखाती है. ज़ाहिर है, हम कभी जागना नहीं चाहते.

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