गहराई के सजग अँधेरे

रोमांच हज़ार सीसी की बाइक में नहीं, उस समझ में है कि कैसे इंजन में हर पल हो रहे हज़ारो विस्फोट गाड़ी कि रफ़्तार में बदल जाते है।

नशा व्हिस्की के जाम में नहीं, उस जुनून में है जिसमे खोकर इंसान सिर्फ किसी एक चाहत के लिए अपना पूरा जीवन कुरबान कर देता है।

मौज फेसबुक, ट्विटर या आइ-फ़ोन में नहीं, उन व्यक्तित्व, उन संवादों, उन कल्पनाओं में है, जो दुनिया को बदल देने की ताकत रखते हैं।

स्वाद पकवान में नहीं, भूखे तन में है। नींद बिस्तर में नहीं, थके टूटे बदन में है। सौंदर्य (या बदसूरती) और कहीं नहीं, खुद तेरे ही मन में है।

जीवन को सतह पर ढूंढना आधुनिकता नहीं सिर्फ फैशन-परस्ती और बेवकूफी है। गहराई के सजग अँधेरे में ही उजाले की लौ जलती है।

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